जिल्द का आईना था, दिल में उतरने वाला,
जब क़रीब से पढ़ा उसको, तो पाया
वो महज शब्दों का था माया -
जाल, भीड़ भरे चौक
में ख़्वाबों का
तिलिस्म
सरे -
आम बेचने वाला, दरअसल हमारे पास हैं -
विकल्पों की कमी, और इसी का
उठाते हैं, लोग ज़बरदस्त
फ़ायदा, उन्हें मालूम
है, उनके सिवा
कोई नहीं
यहाँ
सम्मोहनी चाल से जीतने वाला, हमारी -
बेबसी को झूठे ख़्वाबों के सिवा कोई
राहत नहीं, सिर्फ़ आज जी लें
कल की कोई चाहत नहीं,
वो अच्छी तरह से
जानते हैं
ये
अश्व है, पराजित युद्ध का, ये कभी नहीं
बिदकने वाला, और अगर कहीं से
कोई हिनहिनाए, तो उसे
आँखों में पट्टी बांध
कर राजपथ
पर सर -
पट
दौड़ाया जाए, ये नश्ल आसानी से नहीं -
मरने वाला - -
* *
- - शांतनु सान्याल

बिदकने वाला, और अगर कहीं से
जवाब देंहटाएंकोई हिनहिनाए, तो उसे
आँखों में पट्टी बांध
कर राजपथ
पर सर -
पट
दौड़ाया जाए, ये नश्ल आसानी से नहीं -
मरने वाला - -
सत्य वचन
सुन्दर रचना
हार्दिक आभार - - नमन सह।
हटाएंजब क़रीब से पढ़ा उसको, तो पाया
जवाब देंहटाएंवो महज शब्दों का था माया -
जाल, भीड़ भरे चौक
में ख़्वाबों का
तिलिस्म...।सच कहा है आपने..।सटीक अभिव्यक्ति..।
हार्दिक आभार - - नमन सह।
हटाएंसुन्दर
जवाब देंहटाएंहार्दिक आभार - - नमन सह।
हटाएंहार्दिक आभार - - नमन सह।
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