06 दिसंबर, 2022

ख़्वाब है लाफ़ानी - -

ख़्वाब के बिना सब कुछ हैं आधे अधूरे - -
दरख़्तों के बेजान ढांचे, उजड़े हुए
परिंदों के बिखरे हुए बसेरे,
आंखों में है परवाज़ की
चाहत, जिस्म है
टूटे पंखों की
ज़ुबानी,
ख़्वाबों के बग़ैर बियाबां सी है ये ज़िंदगानी ।
निगाहों में ग़र ख़्वाब हैं ज़िंदा, तो सब
कुछ में है मुहोब्बत की परछाई,
तुम ढूंढते हो मेरी नज़र के
अंदर इक ख़ूबसूरत
सी मंज़िल, जो
दे सके तुम
को इक
पुरसुकूं आशियाना, तुम्हारे इस ख़्वाब में है
शामिल शफ़ाफ़ झरने की रवानी, ख़्वाबों
के बग़ैर बियाबां सी है ये ज़िंदगानी।
ख़्वाब हैं क़रीब तो, गुलाब को
है सुबह का इंतज़ार, जिस
तरह तुम्हें हो मुझ से
बेइंतहा प्यार,
ख़्वाब ले
जाते हैं
हमें
अंधेरे से उजाले की ओर, ख़्वाब ग़र टूट भी
जाए तो कोई बात नहीं, शर्त ये है कि
हम उस का साथ न 
छोड़ें, बाक़ी
सब कुछ तो है आनी -
जानी, ख़्वाबों के
बग़ैर बियाबां
सी है ये
ज़िंदगानी ।    
* *
- - शांतनु सान्याल
 

 

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