सारी रात अरण्य जागता
रहा, सो गई नदी, सो
गया सुदूर तलहटी
का गांव, कुछ
जुगनुओं
की
बस्ती यूँ ही जलती बुझती
रही, तुम आते जाते
रहे, सांसों को, न
मिल सका, पल
भर का भी
ठहराव,
दूर
बहोत दूर, नील आलोक
में भीगती रहीं तुम्हारी
पलकें, गिरती रही
मद्धम, मद्धम,
मेरे प्यार
की
शबनम, जीवन यूँ ही - -
समेटता रहा बेख़ुदी
का बूंद, बूंद
बिखराव,
कुछ
सरसराहट, कुछ जिस्म -
को छूती हुई गिरते
पत्तों की आहट,
कुछ सुप्त
तरंगों
में
चाँदनी की दस्तक, फिर -
हम जी उठे हैं, करवट
बदलती नदी की
तरह, फिर
अज्ञात
किनारों की तरफ बह चले
हैं दीर्घ निःश्वासों के
अविरल बहाव।
* *
- - शांतनु सान्याल
12 फ़रवरी, 2021
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जी नमस्ते ,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (१३-०२-२०२१) को 'वक्त के निशाँ' (चर्चा अंक- ३९७६) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
--
अनीता सैनी
दिल की गहराइयों से शुक्रिया - - नमन सह।
हटाएंबहुत सुंदर अभिव्यक्ति शांतनु जी ।
जवाब देंहटाएंदिल की गहराइयों से शुक्रिया - - नमन सह।
हटाएंआपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शुक्रवार 12 फरवरी 2021 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंदिल की गहराइयों से शुक्रिया - - नमन सह।
हटाएंबहुत सुन्दर रचना।
जवाब देंहटाएंदिल की गहराइयों से शुक्रिया - - नमन सह।
हटाएंअतिसुंदर रचना
जवाब देंहटाएंदिल की गहराइयों से शुक्रिया - - नमन सह।
हटाएंबहुत बहुत सराहनीय रचना
जवाब देंहटाएंदिल की गहराइयों से शुक्रिया - - नमन सह।
हटाएंखूबसूरत एहसासों के समुंदर में डूबी हुई कृति..
जवाब देंहटाएंदिल की गहराइयों से शुक्रिया - - नमन सह।
हटाएंबेहतरीन अभिव्यक्ति ❗🙏❗
जवाब देंहटाएंदिल की गहराइयों से शुक्रिया - - नमन सह।
हटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंदिल की गहराइयों से शुक्रिया - - नमन सह।
हटाएंअत्यंत भावुक क्षणों के शब्द ...कि .. बहोत दूर, नील आलोक
जवाब देंहटाएंमें भीगती रहीं तुम्हारी
पलकें, गिरती रही
मद्धम, मद्धम,
मेरे प्यार
की
शबनम, जीवन यूँ ही - -
समेटता रहा बेख़ुदी
का बूंद, बूंद... डूबते उतराते पलों की ये पंक्तियां...वाह
दिल की गहराइयों से शुक्रिया - - नमन सह।
हटाएंउम्दा रचना
जवाब देंहटाएंदिल की गहराइयों से शुक्रिया - - नमन सह।
हटाएंबहुत सुंदर ही अभिव्यक्ति,सादर नमस्कार
जवाब देंहटाएंदिल की गहराइयों से शुक्रिया - - नमन सह।
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