ईथर की तरह विलीन हो जाएंगे एक दिन सभी अंतर के सुप्त
दहन, उम्र से लंबी है
चाहतों का
सूचीपत्र,
अंतिम
बिंदु में भी लगे ठहरा हुआ सा
ख़्वाहिशों का एक बूंद इत्र,
सभी लोग हैं बंधे हुए
अदृश्य डोर से
न कोई
यहां
किसी का चिर बैरी न कोई गहरा मित्र, सब कुछ नियति के
हाथों में, क्या प्रारब्ध
क्या अन्त्य मिलन,
ईथर की तरह
विलीन हो
जाएंगे
एक
दिन सभी अंतर के सुप्त दहन ।
- - शांतनु सान्याल
क्या अन्त्य मिलन,
ईथर की तरह
विलीन हो
जाएंगे
एक
दिन सभी अंतर के सुप्त दहन ।
- - शांतनु सान्याल
