13 अगस्त, 2026

आंशिक सत्य - -

कुछ सत्य था, कुछ इंद्रधनुष !

समझ पाना था कठिन
आख़िर जीवन रहा
इतने दिन किस
के हस्तगत,
उजाले
और
अंधेरे के मध्य खोजता रहा पसंद 
अपनी, हालांकि चाहतें जीती
रहीं किसी और के मातहत,
समझ पाना था कठिन
आख़िर जीवन रहा
इतने दिन किस
के हस्तगत ।
कुछ महज़
ख़्वाब
थे आसमानी, कुछ प्रेम बेहिसाबी,
सोच ही न पाए दरअसल हम
हैं आख़िर किस पथ के
अनुगामी, दौड़ते
रहे बेतहाशा
परछाइयों
के पीछे
अनवरत, समझ पाना था कठिन
आख़िर जीवन रहा
इतने दिन किस
के हस्तगत ।
- - शांतनु सान्याल

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