कंटीले तार पर थमा हुआ एक बूंद
वर्षा जल, जीवन - मृत्यु के
सीमांत पर एक ठहरा
हुआ एहसास
सदियों
से है
अविकल, कोहरे में ढकी ये सुंदर
घाटियां, पहाड़ों से बहते हुए
ख़ूबसूरत वेगवान झरने,
आज भी बिखेरते हैं
ज़िन्दगी में रंगीन
सपने, सब
कुछ
अपनी जगह रहेगा अचल, समय
के दर्पण में लेकिन ये चेहरा
जाएगा ढल, कंटीले तार
पर थमा हुआ एक
बूंद वर्षा जल ।
- - शांतनु सान्याल
हुआ एहसास
सदियों
से है
अविकल, कोहरे में ढकी ये सुंदर
घाटियां, पहाड़ों से बहते हुए
ख़ूबसूरत वेगवान झरने,
आज भी बिखेरते हैं
ज़िन्दगी में रंगीन
सपने, सब
कुछ
अपनी जगह रहेगा अचल, समय
के दर्पण में लेकिन ये चेहरा
जाएगा ढल, कंटीले तार
पर थमा हुआ एक
बूंद वर्षा जल ।
- - शांतनु सान्याल

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