15 नवंबर, 2022

ख़ुशियों का फेरीवाला - -

बहुत दूर सागर पार, उजाले की लकीर है कोई,
उड़ूं भला कैसे पांव पड़ी मोह की जज़ीर है कोई,

दो खम्भों के मध्य झूलती सी है, आग्नेय रेखा,
दर्शकों के रूबरू पड़ी हुई नंगी शमशीर है कोई,

ज़रा सी नज़र भटकी, तो दुनिया ख़ुदा हाफ़िज़,
वो सुलगते राहों का, तन्हा सा राहगीर है कोई,

ख़रीद फ़रोख़्त के सिवाय कुछ भी नहीं यहाँ पे,
शातिर कारोबारी उजाले में मशहूर पीर है कोई,

ख़ालिस सोने का निःशब्द टूटना तो लाज़िम है,
आम नुक़्ता ए नज़र में वो फूटी तक़दीर है कोई,

हर शख़्स के लिए, जिसके दिल में हो मुहोब्बत,
ख़ुशियों का फेरीवाला, वो शायद फ़क़ीर है कोई,

इंसानियत का हिमायती ही होता है, सच्चा धर्म,
ताक़त की ज़ोर पे, बेकार ही आलमगीर है कोई ।
* *
- - शांतनु सान्याल  

 

 

7 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (16-11-2022) को   "दोहा छन्द प्रसिद्ध"   (चर्चा अंक-4613)  पर भी होगी।--
    कृपया कुछ लिंकों का अवलोकन करें और सकारात्मक टिप्पणी भी दें।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह !
    हर शख़्स के लिए, जिसके दिल में हो मुहोब्बत,
    ख़ुशियों का फेरीवाला, वो शायद फ़क़ीर है कोई,

    जवाब देंहटाएं

  3. हर शख़्स के लिए, जिसके दिल में हो मुहोब्बत,
    ख़ुशियों का फेरीवाला, वो शायद फ़क़ीर है कोई,

    बहुत खूब,सादर नमन सर

    जवाब देंहटाएं

अतीत के पृष्ठों से - - Pages from Past