कितने दिनों के बाद यूँ आईने से बात हुई,
एक ज़माने के बाद, ख़ुद से मुलाक़ात हुई,
उम्र तो गुज़र गई, दरख़्तों के देखभाल में,
आख़री ढलान पे जा कहीं परछाई साथ हुई,
किसे याद रहता है, बचपन की नादानियां,
ख़्वाबों के सफ़र में, यूँ तमाम मेरी रात हुई,
हर कोई था बेचैन, हर कोई जां बचाता सा,
रात ढलते ज़िन्दगी इक आवारा जज़्बात हुई,
आप भी चाहें तो आख़री क़हक़हा लगा जाएं,
बहोत दिनों बाद शहर में, आज बरसात हुई।
* *
- - शांतनु सान्याल

बरसात क्या क्या याद दिला देती है ,सुंदर रचना |
जवाब देंहटाएंआपका ह्रदय तल से असंख्य आभार, नमन सह।
हटाएं