वक़्त के साथ उतर जाते हैं सभी जश्न के
लहर, वो शख़्स था दिल के बहुत ही
क़रीब, कहने को शिकायतें
उससे कम न थी, मुड़
के काश देखता वो
इक नज़र,
दिल
में हमारी मुहोब्बतें कम न थी, म'यार ए
वफ़ा फिर भी रह गई बेअसर, वक़्त
के साथ उतर जाते हैं सभी जश्न
के लहर। वो नज़दीक आया
तो दिल में चाहतें न
रही, दूर जाते
ही जीस्त
में बढ़
गयीं
ज़रूरतें बहुत, कुछ ज़माने ने छिना, कुछ
तक़दीर का था तक़ाज़ा, यूँ तो कहने
को थीं हसरतें बहुत, अब है इक
ख़ामोश सा, रेत का शहर,
सीने के बहुत अंदर,
वक़्त के साथ,
उतर जाते
हैं सभी
जश्न के लहर।
- - शांतनु सान्याल

बिल्कुल ठीक शांतनु जी । आपने जीवन का सच कह दिया अपनी इस अभिव्यक्ति में ।
जवाब देंहटाएंदिल की गहराइयों से शुक्रिया - - नमन सह।
हटाएंजी नमस्ते,
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना आज शुक्रवार 12 मार्च 2021 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन " पर आप भी सादर आमंत्रित हैं ....धन्यवाद! ,
दिल की गहराइयों से शुक्रिया - - नमन सह।
हटाएंवो शख़्स था दिल के बहुत ही
जवाब देंहटाएंक़रीब, कहने को शिकायतें
उससे कम न थी, मुड़
के काश देखता वो
इक नज़र,
दिल
में हमारी मुहोब्बतें कम न थी,
बस पलट कर ही तो नहीं देखते . शिकायत बहुत जल्दी हो जाती . सार्थक भाव से लिखी रचना ,
दिल की गहराइयों से शुक्रिया - - नमन सह।
हटाएंबहुत सुंदर सार्थक सृजन।
जवाब देंहटाएंअभिनव भाव।
दिल की गहराइयों से शुक्रिया - - नमन सह।
हटाएंजी नमस्ते ,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार(१३-०३-२०२१) को 'क्या भूलूँ - क्या याद करूँ'(चर्चा अंक- ४००४) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
--
अनीता सैनी
दिल की गहराइयों से शुक्रिया - - नमन सह।
हटाएंबहुत बहुत सुन्दर सराहनीय ।
जवाब देंहटाएंदिल की गहराइयों से शुक्रिया - - नमन सह।
हटाएंवो शख़्स था दिल के बहुत हीक़रीब, कहने को शिकायतें उससे कम न थी,/
जवाब देंहटाएंमुड़के काश देखता वोइक नज़र,दिलमें हमारी मुहोब्बतें कम न थी,///
आपकी रचनाएँ और उनके भाव निशब्द कर जाते हैं शांतनु जी | रचना को लिखने और सजाने दोनों कलाओं में आपका कोई सानी नहीं | हार्दिक शुभकामनाएं आपके सुंदर और भापूर्ण लेखन के लिए |
दिल की गहराइयों से शुक्रिया - - नमन सह।
हटाएंवो शख़्स था दिल के बहुत ही
जवाब देंहटाएंक़रीब, कहने को शिकायतें
उससे कम न थी, मुड़
के काश देखता वो
इक नज़र,
दिल
में हमारी मुहोब्बतें कम न थी,
बहुत सुंदर रचना। ऐसी रचनाएं कभी कभी पढने को मिलती हैं।
दिल की गहराइयों से शुक्रिया - - नमन सह।
हटाएंलाजवाब रचना. बहुत बधाई.
जवाब देंहटाएंदिल की गहराइयों से शुक्रिया - - नमन सह।
हटाएंवाह बेहतरीन सृजन
जवाब देंहटाएंदिल की गहराइयों से शुक्रिया - - नमन सह।
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