19 मार्च, 2023

भोर की आहट - -

तैराकी ज़रूरी है, सतरंगी मछलियों की तरह,
वरना डूब जाओगे, लापता कश्तियों की तरह,

जकड़ कर रखो, अपने प्रतिबिम्ब को हाथों से,
खो जाओगे कहीं, मूक प्रतिध्वनियों की तरह,

लोग उतार लेते हैं देह से इंद्रधनुषी शल्कों को,
गुप्त मन्त्र चाहिए, मायावी शक्तियों की तरह,

अपने आप ही तुम्हें छूना होगा भोर की आहट,
सतह तक पहुँचों, उजाले की सीढ़ियों की तरह,

परिधि के उस पार है कहीं मेघ विहीन आकाश,
प्रारंभ हो उत्क्रांति शैशव की ग़लतियों की तरह,

मीन पंखों से ले कर विहग के मुक्त उड़ान तक,
अंतहीन हैं स्वप्न उड़ती हुईं तितलियों की तरह,
* *
- - शांतनु सान्याल  

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