20 मई, 2023

रूहानी ख़ुशी - -

याद आई वो बात उनकी रुख़्सत के बाद,
कहना चाहा था जिसे, एक मुद्दत के बाद,

चाहा था उसे हमने अपनी जां से बढ़ कर,
कोई चाह नहीं बाक़ी, इस हसरत के बाद,

बांधा था इक धागा मुहोब्बत के शजर से,
फीके से हैं, सभी सुख इस मन्नत के बाद,

उठ तो आए, उनकी महफ़िल से सोगवार,
कहीं भी बस न पाए, उस हिजरत के बाद,

इक अजीब सा, दिलकश खिंचाव है उसमें,
कहीं जुड़ न पाए, जुनूनी मुहोब्बत के बाद,

ताज ओ तख़्त से भी वो ख़ुशी हासिल नहीं,
सब कुछ है सिफ़र रूहानी मस्सर्रत के बाद,
* *
- - शांतनु सान्याल
 

 

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