सुदूर मुहाने में हैं अप्रत्याशित
कई मधुर स्वप्न जागे,
चंचल सरिता और
जलधि मिलते
हैं दूर कहीं
जा आगे ,
उस
मिलन बिंदु में प्लावित से
हैं कुछ अनंत अनुबंध,
कुसुमित आर्द्र
भूमि, जहाँ
मोहित
से हैं
बावरे मकरंद, प्रीत की
असंख्य पाल
नौकाएं
बहती
जाएँ
धीमे धीमे, जीवन लहर गिरती
उठती मचलती सी जाएँ
धीमे धीमे, वारिद
नयन, तृषित
ह्रदय,
मधुरिम सा ये समर्पण लागे, सुदूर
मुहाने में हैं अप्रत्याशित कई
मधुर स्वप्न जागे।
- शांतनु सान्याल

सुदूर मुहाने में अप्रत्यासित कई मधुर स्वप्न जागे .
जवाब देंहटाएंसुंदर भावाव्यक्ति अच्छी लगी
आपका हृदय तल से आभार ।
हटाएंवाह... बहुत सुन्दर स्वप्न... आपकी रचनाएँ हमेशा पूर्णतया हिंदी व्याप्त होती हैं... और वो भी शुद्ध... कुछ शब्द याद आ जाते है, जो हिंदी टीचर न पढाए थे, तो कुछ नए भी सीखने को मिलते हैं...
जवाब देंहटाएंआपका हृदय तल से आभार ।
हटाएंआप का स्नेह जीवन को एक नया आयाम देता है - नमन सह /
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जवाब देंहटाएंबहुत अच्छी प्रस्तुति
आपका हृदय तल से आभार ।
हटाएंसुंदर रचना।
जवाब देंहटाएंमधुरिम सा ये समर्पण लागे, सुदूर
जवाब देंहटाएंमुहाने में हैं अप्रत्याशित कई
मधुर स्वप्न जागे।
वाह!!!
आपका हृदय तल से आभार ।
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