Thursday, 30 January 2014

ख़ुद से बेख़बर - -

दूर दूर तक है अहसास तनहाई, 
गुलों के रंग ओ अतर भी 
हैं कुछ फीके फीके 
से, बेरंग सी 
हो चली 
है ये 
ज़िन्दगी तेरे जाने के बाद, हर 
चीज़ है मौजूद अपनी 
जगह, हमेशा की 
तरह, फिर 
खिले 
हैं अहाते में कहीं गुल यास, न 
जाने क्या हुआ, दिल है 
है बहोत उदास, 
तेरे जाने के 
बाद,
कि अब हमें नहीं छूती कोई भी  
ख़ुश्बू पहले की तरह, 
लम्हा लम्हा हम 
खो चले हैं
किसी 
और ही जहां में ख़ुद से बेख़बर।

* * 
- शांतनु सान्याल  

 गुल यास - चमेली 

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Gouache-Flower-Painting

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