12 फ़रवरी, 2023

नेपथ्य का फिरकीवाला - -

वस्तुतः हम सभी हैं एक अदृश्य डोर में
बंधे हुए कठपुतली, विशाल रंगमंच
पर चलते फिरते अदाकार, न
जाने कौन है नेपथ्य का
फिरकीवाला, जो
घुमाता है
जीवन
को
अपने इशारे पर, जब तक सांस है सभी
से है गहरी वाबश्तगी, देह गंध की
मिठास, उम्र से लम्बी तिश्नगी;
हद से बढ़ कर दीवानगी;
एक दूजे को अंदर
तक पाने की
बेइंतहा
आस,
सांस विहीन शरीर का कोई नहीं होता
तलबगार, बस इसी एक बिंदु पर
आ कर रुक जाते हैं सभी इश्क़
के फ़लसफ़े, ख़त्म हो जाते
हैं उम्र भर के समस्त
अहंकार । हम सभी
हैं एक अदृश्य
डोर में बंधे
हुए
कठपुतली, विशाल रंगमंच पर चलते
फिरते अदाकार ।
 * *
- - शांतनु सान्याल    




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