Tuesday, 7 January 2014

उसने कहा -

अचानक ही उसने समेट लिया, रौशन 
शामियाना रात ढलने से पहले,
बहोत कुछ था मेरे दिल 
में मनजमद, लेकिन 
उसने कहा - 
ख़ुदा 
हाफ़िज़, दर्द ए दिल पिघलने से पहले, 
उसकी थीं मजबूरियां, या इक 
ख़ूबसूरत किनाराकशी,
उसने मुस्कुराते 
हुए कहा -
फिर 
मिलेंगे कभी, वो जा चुके थे दूर, तारीक 
दुनिया से मेरे, जिस्म से रूह 
निकलने से पहले !

* * 
- शांतनु सान्याल 
मनजमद - जमा हुआ 
तारीक - अँधेरा 
http://sanyalsduniya2.blogspot.com/
feelings 3