Tuesday, 28 January 2014

अभी तक मेरी साँसों में है - -

कुछ दर्द ख़ुसूसी, न पूछ ऐ हमनशीं, -
बाहिजाब रहने दे, ये दिल की 
ख़ूबसूरती, न कर 
बेनक़ाब -
यूँ सरे 
महफ़िल, बस अभी अभी तो ज़िन्दगी
ने सीखा है मुस्कुराना,अभी अभी, 
तेरी निगाहों में हमने देखी 
है इक उभरती ख़ुशी !
कुछ और बढ़े 
दिल की 
कशिश, कुछ दूर तो चले ख़ुमार ए -
नज़दीकी, अभी अभी तो जले 
हैं शाम ए चिराग़, हाले 
दिल न पूछ मुझसे 
से, कि अभी 
ये रात 
है बहोत बाक़ी, अभी तक मेरी साँसों 
में है किसी की याद बाक़ी !

* * 
- शांतनु सान्याल

अर्थ - 
ख़ुसूसी - व्यक्तिगत 
बाहिजाब - परदे के साथ 
ख़ुमार - नशा 
http://sanyalsduniya2.blogspot.com/
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