संभव नहीं एक ही जीवन में परिपूर्ण प्रणय
की प्राप्ति, न जाने कितने प्रकाश वर्ष
चाहिए तुम तक पहुँचने के लिए,
तुम्हें रूह से महसूस करने
के लिए चाहिए न
जाने कितने
जन्म
जन्मांतर की पुनरावृति, संभव नहीं एक
ही जीवन में परिपूर्ण प्रणय की प्राप्ति।
सहज नहीं एक ही जीवन में
तुम तक पहुँच पाए हिय
प्रेषित असमाप्त
कविता, इस
अनंत
अभिलाष का गंतव्य है कहाँ, मुझे ज्ञात
नहीं, बही जा रही है सहस्त्र आलोक
स्रोत लिए अपने संग, वक्ष स्थल
की विक्षिप्त सरिता, इस
संक्षिप्त जीवन में
मुमकिन नहीं
है प्रेम
करना, अनंत जीवन चाहिए इस चाह के
लिए फिर भी न हो पाएगी इस
अक्षय प्रीत की समाप्ति,
संभव नहीं एक ही
जीवन में
परिपूर्ण
प्रणय
की प्राप्ति - - -
* *
- - शांतनु सान्याल

सुंदर अभिव्यक्ति
जवाब देंहटाएंआपका ह्रदय तल से असंख्य आभार, नमन सह।
हटाएंबहुत सुन्दर सटीक विचार , आकर्षक अभिव्यक्ति | सुन्दर रचना |
जवाब देंहटाएंआपका ह्रदय तल से असंख्य आभार, नमन सह।
हटाएंनमस्ते,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा गुरुवार (12-08-2021 ) को धरती पर पानी ही पानी (चर्चा अंक 4144) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है। रात्रि 12:01 AM के बाद प्रस्तुति ब्लॉग 'चर्चामंच' पर उपलब्ध होगी।
चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
#रवीन्द्र_सिंह_यादव
आपका ह्रदय तल से असंख्य आभार, नमन सह।
हटाएंअति उत्तम अभिव्यक्ति
जवाब देंहटाएंआपका ह्रदय तल से असंख्य आभार, नमन सह।
हटाएंजन्म जन्मांतर की पुनरावृति, संभव नहीं एक
जवाब देंहटाएंही जीवन में परिपूर्ण प्रणय की प्राप्ति।
सहज नहीं एक ही जीवन में
तुम तक पहुँच पाए हिय
प्रेषित असमाप्त कविता
गहन भाव लिए बहुत ही सुन्दर कविता
वाह!!!
आपका ह्रदय तल से असंख्य आभार, नमन सह।
हटाएंपढ़कर अभिभूत हूँ।
जवाब देंहटाएंआपका ह्रदय तल से असंख्य आभार, नमन सह।
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