अद्भुत होती है भावनाओं की ज्यामिति, अक्ष
बिंदु पर कहीं ठहरा रहता है जीवन
एकाकी, धूप - छाँव की तरह
प्रतिध्वनित होती है यादों
की आवृत्ति, मधुऋतु
आता है हर वर्ष ले
कर कुछ नव
उपहार,
फिर
हम लिखते हैं, शुष्क नदी तट पर शीर्षक - -
विहीन प्रणय कविता, तलाशते हैं हम
रेत के नीचे अविदित जलाधार,
जहाँ छुपी रहती है अनंत
प्रीत की उत्पत्ति, धूप -
छाँव की तरह
प्रतिध्वनित
होती है
यादों
की
आवृत्ति, अद्भुत होती है भावनाओं की - -
ज्यामिति।
* *
- - शांतनु सान्याल

आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" मंगलवार 31 जनवरी 2023 को साझा की गयी है
जवाब देंहटाएंपाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
दिल की गहराइयों से शुक्रिया।
हटाएंदिल की गहराइयों से शुक्रिया।
हटाएंवाह! शुष्क नदी तट भले हो पर नदी में बहता है अमृत सा नीर वैसे ही जैसे छिपा रहता है मन की गहराई में जीवन
जवाब देंहटाएंदिल की गहराइयों से शुक्रिया।
हटाएंतलाशते हैं हम
जवाब देंहटाएंरेत के नीचे अविदित जलाधार,
जहाँ छुपी रहती है अनंत
प्रीत की उत्पत्ति, धूप -
छाँव की तरह
प्रतिध्वनित
वाह!!!
लाजवाब सृजन ।
दिल की गहराइयों से शुक्रिया।
हटाएंजी , अद्भुत है आपकी भावनाओं की ज्यामीतीय अभिव्यक्ति ।
जवाब देंहटाएंदिल की गहराइयों से शुक्रिया।
हटाएंजी , अद्भुत है आपकी भावनाओं की ज्यामीतीय अभिव्यक्ति ।
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