Thursday, 11 July 2013

वहम ख़ूबसूरत - -

रहने भी दे बरक़रार ये वहम ख़ूबसूरत,
न उठा अभी से राज़ ए चिलमन !
ये सफ़र है बहोत तवील,
दुश्वारियां भी कम 
नहीं, किसे 
है फ़ुरसत कि देखें आईने में अक्स - - 
गुमशुदा, हर शख्स की अपनी 
है तरजीह फ़ेहरिस्त !
न जाने किस 
मरहले 
पे है तेरी मुहोब्बत खड़ी, लिए सीने पे 
इंतज़ार मख़सूस - - 
* * 
- शांतनु सान्याल 
http://sanyalsduniya2.blogspot.com/
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