Friday, 26 July 2013

निगाह महताबी - -

वो ख़ूबसूरत अहसास, जो हो मअतर तेरी 
आँखों की रौशनी से, फिर मुझे देख 
दोबारा निगाह महताबी से !
दश्त ए तन्हाई लिए 
जिगर में, फिर 
तलाश है 
इक ख़ानाबदोश बारिश की, मुख़्तसर ही -
सही, लेकिन बरस कुछ लम्हात 
मुक्कमल कामयाबी से !
इक प्यास है, ये 
ज़िन्दगी !
या कोई भटकती अधूरी ख़्वाहिश, या - - 
सुलगते अरमानों की गूंगी सदा, 
जो भी हो, कभी किसी 
दिन के लिए,
यूँ ही -
अपनापन तो दिखा पुरअसर बेताबी से !
* * 
- शांतनु सान्याल 

Artist Jacqueline Newbold