30 दिसंबर, 2023

मीठा भरम - -

कुछ अश्क ए मोती बिखरे हुए सिरहाने से मिले,

आईना था लाजवाब मुद्दतों बाद दीवाने से मिले,


अक्स ए जुनूं था या अहद ए बर्बादी मालूम नहीं,
रूह से उतर कर शम'अ आख़िर परवाने से मिले,

आईन ए ज़माना, संगसारी से ज़्यादा क्या करेगा,
हज़ार पर्दों से बाहर, न जाने किस बहाने से मिले,

आसां नहीं है दिलों का एक दूजे में तहलील होना,
रहने दो मीठा भरम कि दिल हाथ मिलाने से मिले,

हर सिम्त है ख़ुद को राजा कहलवाने का मुक़ाबला
हर्ज़ क्या ताज ओ तख़्त झूठी क़सम खाने से मिले,

नक़्श ए दुनिया में उसी की तूती बोलती है हर तरफ़
कौन देखता है कि ओहदा ए ख़ास बरगलाने से मिले,
- - शांतनु सान्याल

5 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ अश्क ए मोती बिखरे हुए सिरहाने से मिले,
    आईना था लाजवाब मुद्दतों बाद दीवाने से मिले,

    बहुत खूब,नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं सर🙏

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  2. यार, ये शेर सच में दिल को छू लेते हैं। जिस तरह की भावनाएँ इसमें बसी हैं, वो बेहद नाजुक और गहरी हैं। जैसे हर पंक्ति में किसी पुराने एहसास या याद की खुशबू छुपी हो। मुझे सबसे ज्यादा पसंद आया कि इसमें मोहब्बत और जज़्बातों की उलझन भी है और दुनिया की सच्चाई का एहसास भी।

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