21 दिसंबर, 2023

ख़ुद से बाहर - -

इक बूंद पे ठहरी हुई ये ज़िंदगानी है,

बिलाउन्वान, सांसों की ये कहानी है,  

जज़्बात रहें दिल में, ख़ामोश दफ़न

मुस्कुराता चेहरा न आंखों में पानी है,

ज़िंदगी, ख़ुद तक महदूद नहीं होती 

फ़र्ज़ निभाना ही इंसां की निशानी है,

आईने से बेवजह है, हमें बदगुमानी

किरदार हमारा अक्स ए मेहरबानी है,

दिलो जाँ पे है क़ाबिज़ इश्क़ उनका

ये जज़्बात लेकिन मौजों की रवानी है,

कांच का है आशियाना, ग़ुरूर कैसा

पलभर की ख़ुशी ज़रा सी शादमानी है,

- - शांतनु सान्याल



 



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