Friday, 27 December 2013

दाँव पे लगा दिया - -

तुम्हारी चाहतों में है कितनी सदाक़त 
ये सिर्फ़ तुम्हें है ख़बर, हमने तो 
ज़िन्दगी यूँ ही दाँव पे 
लगा दिया, हर 
मोड़ पर 
हिसाब ए मंज़िल आसां नहीं, तुम्हें - - 
इसलिए दिल में मुस्तक़ल तौर 
पे बसा लिया, वो हँसते हैं 
मेरी दीवानगी पे 
अक्सर !
गोया हमने वस्त सहरा कोई गुलिस्तां 
सजा लिया, ख़ानाबदोश थे इक 
मुद्दत से मेरे जज़्बात, जो 
तुम्हें देखा भूल गए 
सभी रस्ते, 
छोड़ 
दिया ताक़ीब ए क़ाफ़िला, आख़िर में 
हमने, तुम्हारी आँखों में कहीं 
इक घर बना लिया, हमने 
तो ज़िन्दगी यूँ ही 
दाँव पे लगा 
दिया - 

* * 
- शांतनु सान्याल 


http://sanyalsduniya2.blogspot.com/
art by derek m

2 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (29-12-2013) को "शक़ ना करो....रविवारीय चर्चा मंच....चर्चा अंक:1476" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    नव वर्ष की अग्रिम हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    सादर...!!

    - ई॰ राहुल मिश्रा

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