Monday, 5 May 2014

भीगे पल - -

वो लम्हात, जो उम्र भर के लिए
भिगो जाएँ दिल की 
तन्हाइयों को, 
दे जाओ 
कुछ 
निगाहों के बेकराँ साए, ज़िन्दगी 
की इन घटती हुई परछाइयों 
को, नहीं चाहिए मुझे 
लामहदूद कोई 
वादा !
मुस्कराहट की इक बूंद ही काफ़ी 
है ख़ुश्क दिल की गहराइयों 
को - - 

* * 
- शांतनु सान्याल  
http://sanyalsduniya2.blogspot.in/
evening rain 1

2 comments:

  1. मैं हूँ इक चश्मे-ज़द आबो-आब मिरी ज़मीं..,
    और चार सूँ मिरे है तिश्नगी ही तिश्नगी.....

    चश्मे-ज़द = पलक

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