Saturday, 27 April 2013

गुज़रा वक़्त नहीं - -

इस मोड़ के आगे हैं बहोत मुश्किल भरे 
रास्ते, बेनूर चेहरे, नंगे दरख़्त,
संकरी गलियां, खंडहर 
की ख़ामोशी, इक 
सवालिया 
निशां !
उस टूटे पुल से आगे है ख़्वाबों की  ज़मीं,
उजड़ी हुई रात की थकन, चाँद 
के बिखरे अक्स, सिमटी 
हुई रौशनी, हिराज 
ए ज़िन्दगी !
लौट 
जाओ कि ये सफ़र नहीं आसां, फिर  - - 
कभी शीशमहल से ग़र निकल 
पाओ हमेशा के लिए, तो 
आवाज़ दे लेना, कि 
मैं कोई गुज़रा 
वक़्त नहीं 
जो 
कभी न लौट पाऊं तुम्हारे करीब - - - - - 
* * 
- शांतनु सान्याल 
हिराज  - नीलाम 
http://sanyalsduniya2.blogspot.com/
art by ESPERANZA GALLEGO