28 अगस्त, 2026

परिव्राजक - -

एक दिन स्वप्न पिटारा गिर 
कर बिखर 
जाएगा, मायावी आकाश की

तरह बहुत दूर कहीं तब
नज़र आएगा देह
का  शून्य
पिंजर,
अंतरिक्ष में दिशाहारा पखेरू जाने -
किधर जाएगा, एक दिन स्वप्न
पिटारा गिर कर बिखर
जाएगा । जनारण्य
में जिसे खोजता
रहा वही छुपा
हुआ था
मेरे
हिय के अंदर, विवस्त्र मैं खड़ा था
अपने ही सामने और तलाशता
रहा न जाने किसे उम्र भर,
जो मुझे याद करता
रहा दिन - रात,
आँखों से
ओझल
होते
ही सब कुछ बिसर जाएगा, एक
दिन स्वप्न पिटारा गिर कर
बिखर जाएगा ।
- - शांतनु सान्याल




1 टिप्पणी:

  1.  आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में  सोमवार 31 अगस्त, 2026 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in  पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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