कुछ बातें सरल रेखा हो कर भी अपने अंदर अनगिनत वक्र
लिए होती हैं,जन्म और
मृत्यु के मध्य तना
रहता है एक
अबूझ सा
रहस्यमय कैनवास, चतुष्कोणीय
मोह का फ्रेम बांधे रखता है
ज़िन्दगी की गहराई को,
उभरते डूबते सूरज
के बीच हम
खोजते
हैं उड़ते हुए वक़्त की परछाई को,
गहन कोहरे की घाटियों में
कहीं छुपा रहता है
उजले धूप का
एहसास,
जन्म
और मृत्यु के मध्य तना रहता है
एक अबूझ सा रहस्यमय
कैनवास । सूखी नदी
के सीने पर तैरते
हैं कुछ जलरंगी
अतीत के
तस्वीर,
जिसे
छूने की चाह में ख़ुद को ही भूल
जाते हैं भटके हुए राहगीर,
शाम ढलते ही सभी
परिंदों का रंग
स्याह नज़र
आए,
आईना रहता है यथावत सामने
लेकिन मिलता नहीं हमें
उम्रभर ख़ुद से
मिलने का
अवकाश,
जन्म
और मृत्यु के मध्य तना रहता है
एक अबूझ सा रहस्यमय
कैनवास ।
- - शांतनु सान्याल

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