Saturday, 22 March 2014

दूर जाते जाते - -

दर्द के कोहरे से निकल अक्सर देखा 
है; तुझे ऐ ज़िन्दगी मुस्कुराते,
कोई तो है गुमनाम 
शख्स, जो रख 
जाता है; 
ओस में भीगे अहसास, बिहान से - -
पहले, नाज़ुक दिल के अहाते,
मैं चाह कर भी हो नहीं 
पाता लापता, 
उसकी 
नज़र में, वो कहीं न कहीं रहता है - -
शामिल गहराइयों तक मेरे 
वजूद में, मैं लौट आता 
हूँ अँधेरी राहों से 
अक्सर 
उसके सीने में तड़प कर, बहोत दूर 
जाते जाते।

* * 
- शांतनु सान्याल 

http://sanyalsduniya2.blogspot.com/
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