02 अगस्त, 2025

उतार की ओर - -

धुआं सा उठे है वादियों में बारिश थमने के बाद,

राहत ए जां मिले इश्क़ ए ख़ुमार उतरने के बाद,

मिलने को आए लोग जब याददाश्त जाती रही, फ़िज़ूल हैं दुआएं उम्र की दोपहर ढलने के बाद,

ख़्वाबों की रंगीन फिरकी हाथों में वो थमा गए,
आँखों में है नशा बारहा गिर के संभलने के बाद,

वो रहज़न था या कोई पैकर ए जादूगर पोशीदा,
होश में लौटे; दूर तक साथ उसके चलने के बाद,

बहुत मुश्किल है; गहराइयों का सही थाह करना, वक़्त नहीं लौटता रुख़ से कलई निकलने के बाद,
- - शांतनु सान्याल

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