गुरुवार, 10 जून 2021

रंगीन छतरियां - -

एक अजीब सा सन्नाटा है हर तरफ,
नीम से लेकर बरगद वाले चौबारे
तक, कुछ रंगीन छाते उड़ रहे
हैं ऊपर, बहुत ऊपर की
ओर, बाट जोहता
सा है गाँव
मेरा,
उदास आँगन से हो कर नदी के उस
किनारे तक, एक अजीब सा
सन्नाटा है हर तरफ,
नीम से लेकर
बरगद
वाले
चौबारे तक। जोकर का स्वांग रचाए
लोग खड़े हैं, हाथों में लिए कई
तरह की फिरकियां, एक
सुगबुगाहट सी है  
हवाओं में,
दे न
जाएं कहीं फिर वही जादू की झप्पियां,
हम फिर पड़े रहे न कहीं, ऊसर
ज़मीं से ले कर टूटे हुए
ओसारे तक, एक
अजीब सा
सन्नाटा
है हर तरफ, नीम से लेकर बरगद - -
वाले चौबारे तक।

* *
- - शांतनु सान्याल
 


 

22 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार( 11-06-2021) को "उजाले के लिए रातों में, नन्हा दीप जलता है।।" (चर्चा अंक- 4092) पर होगी। चर्चा में आप सादर आमंत्रित हैं।
    धन्यवाद.


    "मीना भारद्वाज"

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  2. हृदय के गांव का मनोहारी वर्णन

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  3. जाएं कहीं फिर वही जादू की झप्पियां,
    हम फिर पड़े रहे न कहीं, ऊसर
    ज़मीं से ले कर टूटे हुए
    ओसारे तक, एक
    अजीब सा
    सन्नाटा

    लाजबाब सृजन,सादर नमन आपको

    जवाब देंहटाएं
  4. नीम से लेकर
    बरगद
    वाले
    चौबारे तक। जोकर का स्वांग रचाए
    लोग खड़े हैं, हाथों में लिए कई
    तरह की फिरकियां, एक
    सुगबुगाहट सी है
    हवाओं में,
    दे न
    जाएं कहीं फिर वही जादू की झप्पियां---बहुत ही गहन और शानदार पंक्तियां हैं...ऐसे लगा जैसे मैं इन्हें बहुत गहरे तक छू आया हूं।

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  5. वाह!बहुत ही सुंदर सराहनीय सृजन सर।
    मन को छूते भाव बिंब आँखों के सामने उभर आए।
    सादर नमस्कार

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  6. एक अजीब सा
    सन्नाटा है हर तरफ,
    नीम से लेकर
    बरगद
    वाले
    चौबारे तक।
    इस अजीब सन्नाटे को बखूबी उतारा है आपने अपनी लेखनी से...
    बहुत ही लाजवाब सृजन
    वाह!!!

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