Tuesday, 13 August 2013

वहम रंगीन - -

है अँधेरा घिरता हुआ, दम ब दम हो चले 
तुम, मेरी ज़ात पे यूँ क़ाबिज़, 
कि छूट चली है दूर 
ये ज़मीं, और 
आसमां 
नज़र आए कोई वहम रंगीन ! फिर है -
तलाश किसी नूर मसीहाई का, 
ये कैसा माहौल ए जुनूं 
है कि तेरे इश्क़ में,
भूल सा चला 
है वजूद,
सारी कायनात ! ये कैसा असर है तेरी 
चश्म किमियाई का, इक अजीब 
सा अहसास ए नशा है हर 
सिम्त, दम ब दम 
ज़िन्दगी 
खींचे जा रही है, जाने किस सम्मोहन - 
की जानिब, तोड़ भी दे कोई ये 
ख़्वाब मेरा बिखरने से 
पहले, कि वास्ता 
है तुम्हें 
सिर्फ़ इक पोशीदा ख़ुदाई का - - - - - - 
* * 
- शांतनु सान्याल 

http://sanyalsduniya2.blogspot.com/
art by Marina Petro 1