26 जुलाई, 2026

अनंत प्यास - -

मुँडेर से उतरती धूप की तरह क्रमशः

सभी संपर्क के बेल बूटे फ़िके हो
गए, फिर भी आसान नहीं
होता पुराने कपड़ों को
फेंक देना, यूँ लगे
बरसों से तन
में लगते
लगते
अंतिम पलों तक हम किसी के हो गए, 
मुँडेर से उतरती धूप की
तरह क्रमशः सभी संपर्क के
बेल बूटे फ़िके हो गए ।
मायावी तंतुओं
में गुथी
रहती है दीर्घ जीने की अदम्य चाहत,
पुरातन जीर्ण शीर्ण पोशाक को
बार बार छु कर देखने की
अभिलाषा, पुनरपि
जननं पुनरपि
मरणम्:  ये
जान कर
भी मिटती नहीं अनंत तियासा, दुःख
सुख के स्रोत मुहाने में एक सरीखे
हो गए, मुँडेर से उतरती धूप
की तरह क्रमशः सभी
संपर्क के बेल बूटे
फ़िके हो
गए ।
- शांतनु सान्याल

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