26 अप्रैल, 2026

तिमिर स्नान - -

सारे महानगर में है एक अजीब सा रंग मशालों का उद् घाटन,

राजपथ के दोनों तरफ हैं
खड़े मंत्रमुग्ध से सहस्त्र
जनगण, गुजरेगा
कुछ ही देर
में राजन
का
स्वर्णिम रथ पुनः बिखर जाएंगे
सभी मायावी स्वप्न, निःशब्द
सीलन भरे दीवारों के
मध्य यथावत अंध
अवगाहन, सारे
महानगर में
है एक
अजीब सा रंग मशालों का उद् घाटन । रहस्यमयी निशीथ - देती है दस्तक, कदाचित
लौट आया हो बरसों
का पलातक, पुनः
यशोधरा है
श्रृंगार
रत,
सारे देह में लपेटे स्वप्न भष्म वो
चाहती है अरण्य गमन, भोर
से पहले गहन निमज्जन,
सारे महानगर में है
एक अजीब
सा रंग
मशालों का उद् घाटन ।
- - शांतनु सान्याल 

3 टिप्‍पणियां:

  1.  आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में मंगलवार 28 एप्रिल, 2026
    को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
      

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  2. यह कविता पढ़कर एक अजीब सा सन्नाटा महसूस होता है। आपने महानगर की चमक के पीछे छिपी खालीपन को बहुत अच्छे से दिखाया। मशालों का उजाला भी यहाँ थोड़ा बनावटी लगता है, जैसे सब कुछ दिखावे के लिए हो रहा हो।

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  3. व‍िशुद्ध ह‍िंदी...वाह ..निःशब्द
    सीलन भरे दीवारों के
    मध्य यथावत अंध
    अवगाहन...बहुत खूब

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