26 अप्रैल, 2026

तिमिर स्नान - -

सारे महानगर में है एक अजीब सा रंग मशालों का उद् घाटन,

राजपथ के दोनों तरफ हैं
खड़े मंत्रमुग्ध से सहस्त्र
जनगण, गुजरेगा
कुछ ही देर
में राजन
का
स्वर्णिम रथ पुनः बिखर जाएंगे
सभी मायावी स्वप्न, निःशब्द
सीलन भरे दीवारों के
मध्य यथावत अंध
अवगाहन, सारे
महानगर में
है एक
अजीब सा रंग मशालों का उद् घाटन । रहस्यमयी निशीथ - देती है दस्तक, कदाचित
लौट आया हो बरसों
का पलातक, पुनः
यशोधरा है
श्रृंगार
रत,
सारे देह में लपेटे स्वप्न भष्म वो
चाहती है अरण्य गमन, भोर
से पहले गहन निमज्जन,
सारे महानगर में है
एक अजीब
सा रंग
मशालों का उद् घाटन ।
- - शांतनु सान्याल 

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