22 अप्रैल, 2026

अपनी शर्तों के तहत - -

मेरी कविताओं का शीर्षक कुछ भी हो

लेकिन वो जीती हैं अपनी ही शर्तों
के तहत, मेरे जीवन का गंतव्य
अज्ञात सही, बियाबान से
लेकर समंदर तक मुझे
तलाश है एक अदद
सुकून की अपने
अंदर तक,
अपनी
ही शर्तों के तहत । मेरे शब्दों का विस्तार
हो अनंत आकाश से गहन सागर
के हृदय तक, ख़ानाबदोशों
की तरह उन्मुक्त हों
तोड़ के सभी
स्वर व्यंजन
की जटिलताएं, मेरी भावनाओं को मिलें
अशेष उड़ान, अंतर्तम में समा जाएं
प्रलयंकारी बवंडर तक, हों सब
कुछ उद्भासित, आडम्बर से
नग्न सत्य के खंडहर
तक, अपनी ही
शर्तों के
तहत ।
- - शांतनु सान्याल

6 टिप्‍पणियां:

  1. काव्य-सृजन अपनी शर्तों के अंतर्गत हो, तभी सार्थक होता है। बहुत अच्छी रचना है यह आपकी।

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  2.  आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में शुक्रवार 24 एप्रिल, 2026
    को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
      

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  3. बहुत सुंदर बात, मानव को अपनी गरिमा को पहचानना है और सत्य को अपने भीतर उद्घाटित होने देना है

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  4. अपनी शर्तों पर कविता
    विशुद्ध खयाल

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  5. अभिनंदन..आकाश हो जाना कैसा होता होगा ..

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  6. आपने जिस तरह “अपनी ही शर्तों” पर जीने की बात कही है, वो एक गहरी आज़ादी का एहसास देती है। मुझे इसमें एक बेचैन तलाश भी दिखती है, जो सुकून के लिए भीतर तक जाती है। आपके शब्द किसी बंधन में नहीं बंधते, बल्कि खुलकर उड़ते हैं, जैसे कोई खानाबदोश अपनी राह खुद चुनता है।

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