Monday, 25 February 2013

जिल्द के मानी - -

इक  रौशनी जो कर जाए अंतःकरण तक 
रौशन, इक बूंद जो तेरी अनुकंपित 
निगाह से टपके, कर जाए 
जीवन मुक्कमल,
हर साँस में 
हो जैसे 
तेरा अक्स निहित, कि किसीका दर्द ओ -
ग़म न हो मुझसे जुदा, ये अहसास 
न मुरझाये कभी कि इक 
इंसानियत ही है 
आला तरीन 
मज़हब,
बाक़ी किताबों की बातें रहने दे सुनहरी - - 
सफ़ात में बंद, ख़ूबसूरत जिल्द 
के मानी नहीं कि दास्तां 
ए ज़िन्दगी भी होगी
दिलकश !
* * 
- शांतनु सान्याल  
http://sanyalsduniya2.blogspot.com/

painting by christopher clark