Friday, 6 April 2012


नज़्म ( اردو عبارت کے ساتھ )

तंग दायरे से निकल कर तो देख ज़रा बाहर 
बेइन्तहां ख़ूबसूरत है ये दुनिया, ख़ुद
तलक  महदूद होने का नाम 
नहीं ज़िन्दगी, नरम 
धूप की मानिंद
बिखर जा वादियों में अल सुबह, बेक़रार से
हैं, कितने ही ख़्वाब शबनम में भीगे
हुए, आ बाद - ए - नसीम के 
हमराह, दिल के जज़्बात 
हैं बेसबर खिल जाने 
के लिए, तेरा 
हर क़दम हो मंज़िल - ए - मसावात की 
जानिब, यहाँ अपना पराया कोई 
नहीं, ये है दुआओं की बस्ती,
यहाँ हर कोई मिस्कीं 
और हर दिल है 
शहंशाह, 
छोड़ जा क़दमों के निशां, ये राह जाती है 
बहोत दूर, दर्ब - ए - बहिश्त 
की तरफ, न सोच देर 
तक की ज़िन्दगी 
है मुख़्तसर, 

- शांतनु सान्याल  
 نظم 


تنگ دائرے سے نکل کر تو دیکھ ذرا باہر
بےنتها خوبصورت ہے یہ دنیا، خود
تلک مهدود ہونے کا نام
نہیں زندگی، نرم
دھوپ کی ماند
بکھر جا مدعیان میں القاعدہ صبح، بےقرار سے
ہیں، کتنے ہی خواب شبنم میں بھیگے
ہوئے، آ بعد - اے - نسیم کے
ہمراہ، دل کے جذبات
ہیں بےسبر کھل جانے
کے لئے، تیرا
ہر قدم ہو منزل - اے - مساوات کی
جانب، یہاں اپنا کا ہے کوئی
نہیں، یہ ہے دعاؤں کی بستی،
یہاں ہر کوئی مسكي
اور ہر دل ہے
شہنشاہ،
چھوڑ جا قدموں کے نشاں، یہ راہ جاتی ہے
بهوت دور، درب - اے - بهشت
کی طرف، نہ سوچ دیر
تک کی زندگی
ہے مختصر،
-شانتنو سانیال 
Window with a flower bed