20 फ़रवरी, 2026

बस यूँ ही - -

बस यूँ ही खड़े हैं हमें किसी

का इंतज़ार नहीं, वक़्त
दौड़ रहा है लेकिन
अब वो रफ़्तार
नहीं, उम्र
भर
बुनते रहे मुहोब्बतों के हसीन
पैरहन, उतरन हर सिम्त
जिनका कोई तलबगार
नहीं, कोहरे से
झाँकती हैं
गुमशुदा
फूलों
की वादियां, गुलदस्ते सजे हुए
दूर तक बस ख़रीददार नहीं,
हवाओं में आज भी है
इक अजीब सी
कशिश, इत्र,
शीशा है
सामने
फिर
भी दिल बेक़रार नहीं, कुछ लोगों
का ठिकाना मानचित्रों में नहीं
होता, दिलों में बसने वालों
को कैसे कहें असरदार
नहीं, एक अदद तन्हा
मुसाफिर मैं ही
नहीं ज़माने
में, जाना
तो है
एक दिन सभी को अभी मैं तैयार
नहीं, बस यूँ ही खड़े हैं हमें
किसी का इंतज़ार
नहीं ।
- - शांतनु सान्याल


 

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