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Thursday, 4 May 2017

सभी को चाहिए - -

सभी को चाहिए कहीं न कहीं कुछ पल
सुकून भरा, कुछ महकते हुए दिन
कुछ खिलती हुईं रातें, कुछ
ख़ालिस अपनापन, कुछ
ख़ामोश निगाहों की
बातें। सभी को
चाहिए
कभी न कभी, कुछ नज़दीकियों की - -
गर्माहट, कुछ सर्दियों के ढलते
दिन, कुछ जाने पहचाने
दिल को छूते हुए
मधुरिम से
आहट,
सभी को चाहिए किसी न किसी मोड़ पर
मुन्तज़िर चेहरे, कुछ गुलाबी मुस्कान,
कुछ ख़ुश्बुओं  में डूबे हुए कलरव,
कुछ खुला खुला सा नीला
आसमान, तमाम
मुखौटों से
दूर
कोई इक सच्चा इंसान, सभी को चाहिए
कुछ पल के लिए ही सही सभी दुःख
दर्द से अवसान।

* *
- शांतनु सान्याल