Sunday, 1 January 2017

नया जिल्द - -

नयेपन का एहसास, यक़ीनन उम्र बढ़ा
देता है, भूली - बिसरी किताब  पर
जैसे कोई जिल्द चढ़ा देता
है। वो कोई दस्तक
था या मेरा
भरम,
जो भी हो, इक पल के लिए ही सही वो
शख़्स, जीने की चाह बढ़ा देता है।
इस दौर में बहोत मुश्किल
है यूँ तो मौलिक चीज़ों
को हासिल करना !
फिर भी,
औपचारिकता ही क्यों न हो इन जाली
मुस्कुराहटों में, ऐ दोस्त, कुछ देर
के लिए ही सही ये जीवन में
प्राणवायु बढ़ा देता है।
भूली - बिसरी
किताब पर जैसे कोई जिल्द चढ़ा देता है।

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- शांतनु सान्याल