Wednesday, 27 April 2016

अवकाश - -

वो तमाम ख़ूबसूरत पल, रहने दो यूँही
जज़्ब मुक्कमल, अभी बहुत दूर
हैं सावन के मेघ सजल।
ठहरो कुछ देर और
ज़रा कि तपते
जज़्बात
को संदली अहसास मिले, भटका हूँ मैं
अनवरत, न जाने कहाँ - कहाँ उम्र
भर, अब जाके तुम मिले हो
किसी ग़ुमशुदा मंज़िल
की तरह, चलो
फिर उड़ें
तितलियों के हमराह, और पहुँचे किसी
वर्षा वन में, सुलगते जीवन को
इसी बहाने कुछ पलों का
अवकाश मिले।

* *
- शांतनु सान्याल

Monday, 18 April 2016

रेशमी अहसास - -

नहीं रुकते रौशनी के बहाव, आसमां
चाहे जितना उदास हो, ज़िन्दगी
और अनगिनत ख़्वाबों के
सिलसिले यूँ ही रहते
हैं रवां इक छोर
से दूसरे
किनारे। ये आईने का शहर है लेकिन
राहों में कोई प्रतिबिम्ब नहीं, वो
तमाम मरहमी चेहरे क़रीब
पहुँचते ही लगे बेहद
ख़ौफ़नाक, जो
दूर से नज़र
आए थे हमदर्द सारे। इक मैं ही न था
यहाँ लुटा मुसाफ़िर, आँख खुलते
ही देखा कि सारा आसमान
है ख़ाली, और दूर तक
बिखरे पड़े हैं कुछ
टूटे हुए तारे।
चलो, फिर इक बार बुने वही ख़्वाबों
की दुनिया, कुछ रंगीन धागे
हो तुम्हारे, कुछ रेशमी
अहसास रहें
हमारे।

**
- शांतनु सान्याल 

Sunday, 10 April 2016

ख़्वाबों के परे कहीं - -

इक अनबुझ तिश्नगी है वो,
जो उठे सुलगते सीने से,
चाँद रात हो या कोई
अमावस का
अंधेरा,
हर लम्हा ज़िन्दगी चाहे उसे
और सिर्फ़ उसे महसूस
करना, अपनी
सांसों की
असीम
गहराइयों में। न कोई कश्ती
न ही कोई किनारा नज़र
आए दूर तक, इक
अजीब सी
ख़मोशी
जोड़ती है मेरी रूह को तुझसे,
बहुत मुश्किल है कुछ
अहसासों को यूँ
लफ़्ज़ों का
पैरहन
देना, कुछ पिघलते जज़्बातों
का यूँ हक़ीक़त में ढलना,
ख़्वाबों के परे किसी
का, यूँ उजाड़
हो कर
अंतहीन मुहोब्बत करना - - -

* *
- शांतनु सान्याल

Monday, 4 April 2016

निगाहों के परे - -

अभी हल्का सा अंधेरा है दूर तक, ज़रा रात
को और गहराने दे, मुझे बेशक़ यक़ीं है
तेरी सदाक़त पे ऐ दोस्त, फिर भी
चाँद सितारों को ज़रा, और
उभर आने दे। अभी
मेरे लब पे आ
ठहरे हैं
तेरे सांसों के कुछ उड़ते हुए बादल, कुछ देर
यूँ ही बेख़ुदी में, ज़िंदगी को और बहक
जाने दे। वो नशा जो रूह तक
उतर जाए दम - ब - दम,
कुछ इस अंदाज़ में
मेरे मेहबूब,
दिल की
ज़मीं पे, नीम सुलगता आसमां उतर आने
दे। न सोच अभी से तक़दीर ए शमा,
अभी तो बहुत दूर है सुबह की
दस्तक, मेरी निगाहों
के परे कोई नहीं
इस पल
इक तेरे सिवा, इसी पल में मुझे मुकम्मल
पिघल जाने दे।

* *
- शांतनु सान्याल