Saturday, 22 November 2014

ख़िराज ए शायरी - -

दुनिया की निगाहों से बच के निकलना
है बहोत आसां, मुश्किल हो बहोत
जब, अक्स चाहे सूरत हिसाब
अपना, वो आदमी जो
उम्र भर ओढ़ता
रहा जाली
चेहरा, आख़री वक़्त था बहोत बेबस - -
इक वाक़िफ़ आईने के लिए,
दरअसल, हम ख़ुद ही
लिखते हैं अपने
लिए ख़िराज
ए शायरी !
ज़िन्दगी भर का किरदार रहता है दर्ज,
नमूंदार आख़रीन नफ़स में - -

* *

- शांतनु सान्याल  


دنیا کی نگاہوں سے بچ کے نکلنا
ہے بهوت آساں ، مشکل ہو بهوت
جب، عکس چاہے صورت حساب
اپنا، وہ آدمی جو
عمر بھر اوڑھتا
رہا جعلی
چہرہ، آخری وقت تھا بهوت بے بس - -
اک واقف آئینے کے لئے،
دراصل، ہم خود ہی
لکھتے ہیں اپنے
لئے خراج
اے شاعری!
زندگی بھر کا کردار رہتا ہے درج،
نمودار آخرین نفس میں - -

* *
-  شانتنو سانیال


 

http://sanyalsduniya2.blogspot.in/
Linda Griffin  Watercolorist – Architectural Gallery