Saturday, 10 May 2014

बहोत मुश्किल है - -

रहने दे मुझे गुमशुदा ख़्वाबों की 
ज़मीं पे, कुछ देर ही सही 
झुलसती रूह को 
राहत ए जां 
मिले, 
हर शख़्स यहाँ मबहम सा लगे,
किस पे यक़ीं करें, चेहरे पे 
चस्प हैं जैसे रंगीन
मुखौटे, ऊपर 
से हैं सभी 
वादी ए गुल, अन्दर से लेकिन -
ख़ारदार रेगिस्ताँ मिले,
बहोत मुश्किल 
है संदली 
अहसास को छूना, वादी ए सकूं 
की तलाश में, हर इक 
क़दम पे मख़फ़ी 
आतिशफ़िशां 
मिले !

* * 
- शांतनु सान्याल 

अर्थ - 
मबहम - रहस्यमय 
ख़ारदार - कँटीले 
 संदली - चन्दन की तरह 
मख़फ़ी - छुपे हुए 
आतिशफ़िशां - ज्वालामुखी 
वादी ए सकूं - शांत घाटी 
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Sweet realization