Monday, 28 April 2014

रूबरू आईना - -

झुलसी हुई भावनाओं को फिर
पहली बारिश का अहसास
मिले, जिन्हें हमने
तलाशा उम्र
भर
काश, वही शख़्स यहीं दिल के
आसपास मिले, तपते
सहरा से निकल
तो आए
हम
किसी तरह, अब ये क़िस्मत -
की बात है कि कोई आम
या ख़ास मिले, इक
दीवानगी सी
रही मेरे
दिल
ओ दिमाग़ में, किसी सूरत ए
शफ़ाफ़ के लिए, जब भी
देखा आईना, बहोत
सारे ख़राश
मिले,

* *
- शांतनु सान्याल
http://sanyalsduniya2.blogspot.com/
Vase Of Flowers-Claude Monet Painting