Wednesday, 16 April 2014

मुझ से बिछुड़ कर - -

वो मुझ से बिछुड़ कर, किसी 
और से उम्र भर जुड़ न 
सका, खुली रहीं 
हर सिम्त 
दिल 
की वादियां, फूल, दरख़्त ओ 
बहते हुए झरने, क्या 
कुछ न थे उसके 
सामने, फिर 
भी न 
जाने क्यूँ, वो चाह कर भी - -
खुले आसमां पे उड़ न 
सका, कोई क़सम 
न थी हमारे 
दरमियां,
न ही 
कोई क़रारनामा, दिल की - - 
किताब थी खुली हुई 
उसके रूबरू,
फिर 
भी न जाने क्यूँ आसां लफ़्ज़ों 
की शायरी वो पढ़ न 
सका, वो मुझ से 
बिछुड़ कर, 
किसी 
और से उम्र भर जुड़ न सका,

* * 
- शांतनु सान्याल 

http://sanyalsduniya2.blogspot.com/
painting by Maria Serafina