Saturday, 12 April 2014

कोई ख़ास बात न थी - -

कोई ख़ास बात न थी मुझ में, फिर भी 
न जाने क्यूँ, इक ज़माने से वो 
मुझे भुला न सका, बहोत 
ख़्वाहिश थी उसके 
दिल में, कि 
बनाए 
राज़दार अपना, मगर चाह कर भी वो 
उम्र भर, अपने नज़दीक मुझे 
बुला न सका, दरअसल 
हर शख़्स की हैं 
अपनी 
ही तरज़ीह फ़ेहरिश्त, बहोत कोशिश -
की उसने लेकिन, उनींदी ख्वाबों 
को गहरी नींद सुला न 
सका, इक ज़माने 
से वो मुझे 
भुला 
न सका, चाह कर भी अपना बना न 
सका - - 

* * 
- शांतनु सान्याल 
http://sanyalsduniya2.blogspot.com/
paintings by Polly Thayer