Sunday, 9 February 2014

अहाते में कहीं - -

अहाते में कहीं खिलें हैं रजनीगंधा -
या तेरी मुहोब्बत का यक़ीं 
हो चला है इस दिल को, 
रात भर बरसे 
हैं आवारा 
बादल, या छूती रही रुक रुक कर - -
बेचैन लहर साहिल को, न 
जाने कैसी है ये मद्धम 
अहसास की 
ख़ुश्बू,
भिगोती है रात ढले सांस बोझिल को, 
इक मीठा सा दर्द है, जिस्म ओ 
जां में मेरे, क्या कहें या 
न कहें उस हसीं 
क़ातिल को,
धीरे -
धीरे तेरी मुहोब्बत का यक़ीं हो चला -
है इस दिल को - -

* * 
- शांतनु सान्याल 
http://sanyalsduniya2.blogspot.com/
art by FABIO CEMBRANELLI.jpg 1