Tuesday, 11 February 2014

वो आज भी है - -

वो आज भी है बहोत दिलकश,
नाज़ुक सुबह की किरण 
की तरह, खुलती 
हैं, जज़्बात 
की नाज़ुक पंखुड़ियां उसकी - -
निगाहों की धूप ले कर,
वो आज भी है बेहद 
हसीं, खिलते 
हैं उदास 
लम्हें, उसके ओंठों की सहमी 
सहमी सी पुरअसरार 
हँसी ले कर, रहे 
मौसम की 
अपनी 
मजबूरियां, बदलना है उसके 
फ़ितरत में शामिल, वो 
आज भी है बहोत
ज़िन्दगी के 
नज़दीक,
ख़ुश्बूदार साँसों की तरह - - - 

* * 
- शांतनु सान्याल 

http://sanyalsduniya2.blogspot.com/
misty wild bloom