Friday, 21 February 2014

दर्द अपना अपना - -

वो देखते रहे अक्स अपना, नम -
निगाहों में एकटक, मुस्कुरा 
के हमने, आँखों को 
यूँ आईना बना 
लिया, वो 
खेलते रहे बारहा जज़्बात ए दिल 
से मेरे, हर बार उनकी जीत 
पे हमने, दर्द अपना
यूँ छुपा लिया,
कुछ पाने 
के वास्ते ज़िन्दगी में बहोत कुछ 
खोना भी लाज़िम है, वो 
हमसे कितने रहे 
मरासिम, या 
हमने 
कितने निभायी वफ़ादारी, कहना 
है बहोत मुश्किल, दिखावा 
रहा कितना और 
मयार ए 
ईमान कितना, ये बात और है कि 
इश्क़ को उसने, ख़ुदा बना 
दिया। 

* * 
- शांतनु सान्याल 
http://sanyalsduniya2.blogspot.com/
art by karen margulis
http://4.bp.blogspot.com/_JY6pRnNQdT0/TBk9IQi7jpI/AAAAAAAASUk/PoyFg9ji91w/s1600/001.JPG