Saturday, 18 January 2014

आजकल - -

मुलायम सा ख़ुमार है तारी जिस्म
ओ जां में आजकल, पहले तो
मौसम में कुछ ठहराव
सा देखा है हमने,
लेकिन कुछ
बदलाव
सा है आसमां में आजकल, इन -
रंग ओ नूर की लकीरों में
कहीं तेरी मुहोब्बत
करती है
तरसीम ए ज़िन्दगी, पहले तो न
थी इतनी ख़ूबसूरत ज़िन्दगी
अपनी, इक अजीब सी
हलचल है जज़्बात
ए कारवाँ में
आजकल,
मुलायम सा ख़ुमार है तारी जिस्म
ओ जां में आजकल - -

* *
- शांतनु सान्याल
अर्थ -
 तारी - छाया हुआ
तरसीम - चित्रांकन
http://sanyalsduniya2.blogspot.com/
poetic beauty